Monday, September 12, 2011

क्षमा वीरस्य भूषण.....

क्षमा वीरस्य भूषणं ....अनेक अवसरों पर मन की सीमायें खो जाती हैं ,एक पल में अनेकों मन दुखाये जा सकते हैं
ऐसे ही किसी अवसर पर जाने अनजाने विचार,वाणी या व्यवहार से मैंने या मेरे परिवार ने आपका दिल दुखाया हो या
कोई संताप दिया हो तो हाथ जोड़ कर मान मोढ़ कर आपसे खम्मत खामना ( क्षमा मांगना ) चाहते हैं, क्षमा याचना
के इस पावन पर्व पर उदारतापूर्वक हमें क्षमा करें, आप क्षमा करने के योग्य हैं .....शील एवं परिवार ....

1 comment:

  1. Amazing post uncle. I am sure if we all follow this, it will be easier to maintain peace without holding any grudges.

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