Saturday, August 27, 2011

अन्ना टीम की दादागिरी : नया नजरिया


अपने अपने गिरहबान में झाँकने का समय आ गया है.कब तक दुसरे को दोषी बना कर खुद
को सुरक्षित करते रहेंगे.अभी तो अन्ना की नैतिक दादागिरी ही झेलनी पद रही है.आगे का
समय और भी भयानक हो सकता है जब कोई भी दाऊद,अफज़ल या ठाकरे पूरे देश को
या देश के किसी हिस्से को बंधक बना कर व्यवस्था को ठेंगा दिखा देगा.और संसदीय
प्रणाली को पलीता लगा देगा .१२० करोड़ जनसँख्या के देश में २०,३० हज़ार की भीड़
जोड़ कर , लोकप्रियता की पालकी पर सवार होकर अनशन की आड़ में धमकाता हुआ
एक नया प्रहसन करने वाला कोई भी व्यक्ति देश का उद्धारक बन सकता है....विचार करिए
देश सिस्टम की असफलता के मुहाने पर खड़ा है.पहले तो हमारे प्रतिनिधियों को परिष्कृत
होना होगा.जितनी भी संस्थाएं सुधार करने को बनी हैं उनका क्या हश्र है ये भी देखिये.
लोकपाल देश में कितना सुधार ला पायेगा इस पर भी विचार करने का समय है.स्वयं को बदले
बिना कोई व्यवस्था सफल नहीं होती.........

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