Friday, June 10, 2011

पावस आएगा क्या ????

मुझे पता है,
तुम पावस के एक टुकड़े को
देखते हो टकटकी बांधे ,
आँखों में पाले सपने सा
नजदीकी रिश्तेदारी में गए अपने सा.
पर अब पावस भी नहीं आता बेलौस
आता है एक धुंधले कुहासे में ढका,
शरमाता,संकुचाता,लडखडाता ,
कभी किसी ठूंठ के कंधे पर
सर रख सिसकी भरता पावस
आता है.....
शहर की चौहद्दी पर ठिठकता,
धुएं से सहमता लौट जाता है,
फिर किसी दिन आने को .....
आंचल में मीठा पानी लाने को,
तुम कब तक देखोगे राह पावस की
वो आएगा तो भी आ नहीं पायेगा.........
Sheel Kumar

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